जय जिनेन्द्र ,
एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है। जैसे मैंने अपने पिछले ब्लॉग में बताया था कि श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा में 32 आगम होते हैं । 

आज हम उन 32 आगमो के बारे में कुछ विस्तार से जानेंगे , आज हम यह जानेंगे कि वह  32 आगम के नाम क्या है , तो चलिए शुरू करते हैं ।

श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा में 32 आगमो को चार  भागों में बताया गया है जो कि इस प्रकार हैं :-
ग्यारह अंग सूत्र , बारह उपांग , चार मूल सूत्र और चार छेद सूत्र ।

यह चारों किसी आगम के नाम नहीं है बल्कि आगमो को इन चारों में विभाजित किया गया है ।

अब आते हैं आगम के नाम , इसमें  1-32 तक जो नाम बताए गए वही आगमो के नाम है ।

ग्यारह अंग सूत्र :-
1)  आचारांग (आयारो )
2)  सूत्रकृतांग (सूयगडो )
3)  स्थानाङ्ग (ठाणं )
4)  समवायाङ्ग (समवाओ ) 
5)  व्याख्याप्रज्ञप्ति (विवाहपण्णत्ती , भगवई )
6)  ज्ञाताधर्मकथाङ्ग (णायाधम्मकहाओ )
7)  उपासकदशाङ्ग (उवासगदसाओ )
8)  अन्तकृद्दशाड़ (अंतगडदसाओ )
9)  अनुत्तरौपपातिकदशा (अणुत्तरोववाइयदसाओ )
10) प्रश्नव्याकरण (पण्हावागरणाइं )
11) विपाक सूत्र (विवागसुयं )

 बारह उपांग :-
12) औपपातिक [उ (ओ )ववाइय ]
13) राजप्रश्नीय (रायपसेणियं )
14) जीवाभिगम (जीवाभिगमो ) 
15) प्रज्ञापना (पण्णवणा )
16) जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति ( जम्बूद्दीवपण्णात्ती )
17) चन्द्रप्रज्ञप्ति (चंदपण्णत्ती ) 
18) सूर्यप्रज्ञप्ति (सूरपण्णत्ती ) 
19) निरयावलिका (णिरयावलियाओ कप्पियाओ ) 
20) कल्पावतंसिका (कप्पवडंसियाओ ) 
21) पुष्पिका (पुप्फियाओ )
22) पुष्पचूलिका (पुप्फचूलियाओ )
23) वृष्णिदशा (वण्हीदसाओ )

चार मूल सूत्र :-
24) उत्तराध्ययन (उत्तरज्झयणाइं ) 
25) दशवैकालिक (दसवेयालियं ) 
26) नंदीसूत्र (नंदी ) 
27) अनुयोगद्वार सूत्र (अणुओगदाराइं ) 

चार छेद सूत्र :-
28) दशाश्रुतस्कन्ध (दसाओ ) 
29) बृहत्कल्प (कप्पो ) 
30) व्यवहार सूत्र (ववहारो ) 
31) निशीथ सूत्र (निसीह ) 

32) आवश्यक सूत्र (आवस्सयं ) ।

यह थे हमारे 32 आगम के नाम । आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।


अगले ब्लॉग में हम जानेंगे कि हर आगम को पढ़कर हमें उस आगम से क्या सीखने को मिलेगा अर्थात उसमें क्या-क्या जानकारी दी गई है। और आगे जाकर हम यह भी सीखेंगे की कोनसा आगम किस समय पड़ा जाना चाहिए ।

अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म । 

पूरा ब्लॉग पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । अगर आपको यह ब्लॉग अच्छा लगा हो तो नीचे comment में हमें जरूर बताएं ।आप हमें FOLLOW एवं E-MAIL द्वारा सब्सक्राइब भी कर सकते हैं ताकि आपके पास यह ज्ञान निरंतर आता रहे।

 
जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर