जय जिनेन्द्र ,
एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है । जैसे मैंने अपने पिछले ब्लॉग में बताया था कि इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि हर आगम को पढ़कर हमें उस आगम से क्या सीखने को मिलेगा अर्थात उसमें क्या-क्या जानकारी दी गई है।

तो आज हम आगामो के बारे में थोड़ा विस्तार से जानेंगे। आज हम 1 से 11 आगमो में क्या सिखने को मिलता है यह पता लगाएंगे । इन आगमो को ग्यारह अंग सूत्र भी कहते है जैसा मैने पीछले ब्लॉग में बताया था ।

1)  आचारांग (आयारो ) = इस आगम से हमें यह शिक्षा मिलती है कि साधु जी को अपनी जीवन चर्या कैसी रखनी चाहिए अर्थात साधु जी अपनी जीवन चर्या कैसी रखते हैं ।

2)  सूत्रकृतांग (सूयगडो ) = इस आगम से हमें सभी धर्मों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त होती है । इस अगम को सभी धर्मों का आनंद मेला कहते है ।

3)  स्थानाङ्ग (ठाणं ) = यह आगम में हमें 1 से 10 स्थान तक का वर्णन बताया गया है । इन 10 स्थान के बारे में हम जब आगम पढ़ेंगे तब और विस्तार में जानेंगे ।

4)  समवायाङ्ग (समवाओ ) = यह आगम को अंको का खजाना भी कहते हैं और इसे पढ़ने के बाद हमें अंको के रूप में अनेक जानकारियां प्राप्त होती है ।

5)  व्याख्याप्रज्ञप्ति (विवाहपण्णत्ती , भगवई ) = इस आगम में 36000 प्रश्न और उनके समाधान दिए गए हैं । इस आगम को पढ़कर हम 36000 प्रश्न और उनके समाधान प्राप्त कर सकते हैं जो हमें जीवन में कई दफा काम आते हैं ।

6)  ज्ञाताधर्मकथाङ्ग (णायाधम्मकहाओ ) = इस आगम में शिक्षाप्रद घटित कथाएं बताई गई है जो हमारे जीवन में काम आती है ‌।

7)  उपासकदशाङ्ग (उवासगदसाओ ) = इस आगम में हमें 10 श्रावकों का वर्णन बताया गया है ।

8)  अन्तकृद्दशाड़ (अंतगडदसाओ ) = इस आगम को पढ़कर हम मोक्ष जाने वाले 90 महापुरुषों का वर्णन प्राप्त कर सकते हैं  और हम भी मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।

9)  अनुत्तरौपपातिकदशा (अणुत्तरोववाइयदसाओ ) = इस आगम में हमें अनुत्तर विमान में जाने वाले महापुरुषों का वर्णन प्राप्त होता है जिनकी भगवान ने प्रशंसा की है ।

10) प्रश्नव्याकरण (पण्हावागरणाइं ) = इस आगम को पढ़कर हम आश्रव एवं संवर के द्वार के बारे में जान सकते हैं तथा नरक का भी वर्णन इस आगम में दिया गया है ।

11) विपाक सूत्र (विवागसुयं ) = इस आगम को पढ़कर हमें सुख एवं दुख के फल का वर्णन प्राप्त होता है ‌।

आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।

अगले ब्लॉग में हम जानेंगे कि बारह उपांग को पढ़कर हमें उस आगमो से क्या सीखने को मिलेगा अर्थात उसमें क्या-क्या जानकारी दी गई है। 

अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म । 

पूरा ब्लॉग पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । अगर आपको यह ब्लॉग अच्छा लगा हो तो नीचे comment में हमें जरूर बताएं ।आप हमें FOLLOW एवं E-MAIL द्वारा सब्सक्राइब भी कर सकते हैं ताकि आपके पास यह ज्ञान निरंतर आता रहे।


जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर