जय जिनेन्द्र , 
मैं नमन जैन , आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत करता हूं। इस ब्लॉग को बनाने के पीछे बड़ा ही खास मकसद है । इस ब्लॉग के द्वारा मैं भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए गए मोक्ष मार्ग को विश्व के सभी मनुष्यों तक पहुंचाना चाहता हूं । साथ ही साथ जो लोग लाचार है , जो साधु संत का सानिध्य प्राप्त नहीं कर सकते , जिसके आस पास साधु संत नहीं बिराजते है , जो ज्ञान ध्यान सीखना चाहते हैं लेकिन सीख नहीं पाते उन सबको इस माध्यम से आगम ज्ञान पहुंचाना मेरा मकसद है । एक मेरा निजी स्वार्थ यह भी है कि मैं स्वयं सभी आगम का अध्यन करना चाहता हूं लेकिन मैं कर नहीं पाता तो इस तरह में अपना भी ज्ञान बड़ा पाऊंगा।
वैसे तो जैन धर्म में कई सारे अलग अलग संप्रदाय है जैसे श्वेतांबर और दिगम्बर और इसमें भी श्वेतांबर में स्थानकवासी , तेरापंथ , मंदिरमार्गी आदि अलग अलग है और इसके अंदर भी कई सारे गछ और कई सारे गुरुदेव है । इसका यह अर्थ नहीं है कि अलग गछ ने अपने अनुसार आगम में बदलाव किए है , किसी ने आगम में बदलाव नहीं किया है । लेकिन सबका उद्देश्य भगवान महावीर स्वामी के बताए गए मोक्ष मार्ग को अपनाना और सभी मनुष्य तक पहुंचना है । जो चीज मायने रखती है वह यह है कि आप के भाव कैसे हैं और इस जिनवाणी को एवं महावीर स्वामी द्वारा बताए गए आगम को सुनकर एवं पढ़कर आप किस तरह से अपने शरीर और आत्मा का शुद्धिकरण करते हैं।
मैं स्वयं श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा का पालन करता हूं । लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि मैं किसी और परंपरा का विरोध करता हूं । आप चाहे जिस भी परंपरा के हो आप आगमवाणी अर्थात भगवान महावीर द्वारा बताए गए रास्ते पर चलें और उसके अनुसार आचरण करेंगे तो अवश्य ही मोक्ष मार्ग प्राप्त करेंगे ।
इस ब्लॉग पर आपको श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा में जो 32 अगम है वह आपके सामने पहले आगे रखा जाएगा उसके बाद हमारी यह भी कोशिश रहेगी कि आपके सामने अन्य सभी परंपराओं के सभी आगम आपके सामने लाए जाए ।
तो अगर आप भी जैन धर्म के बारे में जानना चाहते हैं और उसे अपने जीवन में अपनाकर मोक्ष मार्गी बनना चाहते हैं तो बने रहिए हमारे साथ और हमारे हर एक ब्लॉग को अच्छे से पढ़िए और उसको अपनी जीवन में उतारिए ।
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आपका धन्यवाद 
जय जिनेंद्र