जय जिनेन्द्र ,
एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ।
हे भंते ! हम पे दया रखना
हे भंते ! हम पे दया रखना ।।
और किसी से आश करें क्या, जग झूठा नाता,
हे भंते ! हम पे दया रखना ।।
देव हमारे श्री अरहन्ता, गुरु हमारे गुणीजन संता,
धर्म हमारा दया अहिंसा, भव भव में त्राता,
हे भंते ! हम पे दया रखना ।।
धर्म ही मुझको तारण हारा, धर्म ही मुझको प्राण पियारा,
सिवा धर्म के किसी के आगे, झुके नहीं माथा,
हे भंते ! हम पे दया रखना ।। चारों तरफ है घोर अंधेरा, देता नहीं है शरण अनेरा,
ढूँढत आया शरणा दे दो, दया करो दाता,
हे भंते ! हम पे दया रखना ।।
चम चम चम ज्यों चंदा चमके, हीरे का हर कोना दमके,
धर्म ध्यान से चेतन मेरा, ज्योतिर्मय दाता,
हे भंते ! हम पे दया रखना ।।
आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।
अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म ।
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जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर ।

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