जय जिनेन्द्र ,
एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ।
सीखो
फूलों से तुम हँसना सीखो, भँवरों से तुम गाना ।
वृक्षों की डाली से सीखो, फल आए झुक जाना ।
सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना ।
मेहंदी के पत्तों से सीखो, पिसकर रंग चढ़ाना ।
सुई और धागे से सीखो, बिछुड़े भाई मिलाना ।
दूध और पानी से सीखो, मिलकर प्रेम बढ़ाना ।
परवानों से सीखो धर्म पर, हँस-हँस प्राण चढ़ाना ।
वायु के झोंको से सीखो, आगे बढ़ते जाना ।
आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।
अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म ।
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जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर ।

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