जय जिनेन्द्र ,
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सामायिक में वर्जनीय बत्तीस दोष
काया के बारह दोष
कुआसणं चलासणं चलदिट्ठी,
सावज्जकिरिया - लंबणा - कुंचण पसारणं ।
आलस्स मोडण मल विमासणं,
निद्दा वेयावच्चत्ति बारस कायदोसा ।। १॥
१. कुआसन - सामायिक के अयोग्य आसन से बैठे तो " कुआसन" दोष । ठांसणी मार के बैठना, पाँव पर पाँव रख कर बैठना, पाँव पसार कर बैठना, अभिमान-सूचक आसन से बैठना आदि सभी कुआसन (अयोग्य आसन) हैं।
२. चलासन - सामायिक में स्थिर आसन न रखे, आसन बदलता रहे तो "चलासन" दोष ।
३. चलदृष्टि - सामायिक में दृष्टि को स्थिर न रखे तो "चलदृष्टि" दोष ।
४. सावद्यक्रिया - सामायिक में शरीर से सावद्य-क्रिया करे, घर की रखवाली करे, इशारा करे तो "सावद्य-क्रिया" दोष ।
५. आलम्बन - सामायिक में बिना कारण भींत आदि का सहारा लेवे तो "आलम्बन" दोष |
६. आकुंचन प्रसारण - सामायिक में बिना प्रयोजन हाथ-पाँव को संकोचे पसारे तो " आकुंचन प्रसारण" दोष ।
७. आलस्य - सामायिक में अंग मोड़े तो "आलस्य" दोष ।
८. मोडण - सामायिक में हाथ - पाँव की अंगुलियों का कड़का निकाले तो "मोडण" दोष ।
९. मल - सामायिक में मैल उतारे तो "मल" दोष ।
१०. विमासण - गाल (कपोल) आदि पर हाथ लगाकर शोकासन से बैठे तो "विमासण" दोष अथवा सामायिक में बिना पूंजे खाज करे या बिना पूँजे चले तो "विमासण" दोष ।
११. निद्रा - सामायिक में नींद लेवे तो "निद्रा" दोष ।
१२. वैयावृत्य - सामायिक में अव्रती की सेवा करे, अव्रती से सेवा करावे तथा बिना कारण व्रती से सेवा करावें तो "वैयावृत्य" दोष ।
आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।
अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म ।
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जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर ।

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