जय जिनेन्द्र ,
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सामायिक में वर्जनीय बत्तीस दोष
वचन के दस दोष
कुवयणसहसाकारे,
सछंद संखेव कलहं च ।
विगहा वि हासोऽसुद्धं,
णिरवेक्खो मुणमुणा दोसा दस ।।
१. कुवचन - सामायिक में कुवचन (कुत्सित वचन) बोले तो "कुवचन" दोष ।
२. सहसाकार - सामायिक में बिना विचारे बोले तो "सहसाकार" दोष ।
३. स्वच्छन्द - सामायिक में राग उत्पन्न करने वाले संसार संबंधी गीत ख्यालादि गाने गावे तो "स्वच्छन्द" दोष।
४. संक्षेप - सामायिक के पाठ और वाक्य कम कर के बोले तो "संक्षेप" दोष ।
५. कलह - सामायिक में क्लेशकारी वचन बोले तो "कलह" दोष ।
६. विकथा - सामायिक में स्त्रीकथा 🌸, भोजनकथा, देशकथा, राजकथा इन चार कथाओं में से कोई कथा करे तो "विकथा" दोष ।
७. हास्य - सामायिक में हँसी मजाक करे तो "हास्य" दोष ।
८. अशुद्ध - सामायिक में पाठों का उच्चारण भली प्रकार से नहीं करे अथवा सामायिक में अव्रती को "आओ, पधारो" कह कर सत्कार-सम्मान देवे या उसे आने-जाने का कहे तो "अशुद्ध" दोष ।
९. निरपेक्ष - सामायिक में उपयोग बिना बोले तो "निरपेक्ष" दोष ।
१०. मुणमुण - सामायिक में स्पष्ट उच्चारण न कर के गुण-गुण बोले (गुनगुनावे) तो "मुण-मुण" दोष ।
🌸 श्राविकाओं को 'स्त्री कथा' के स्थान पर 'पुरुष कथा' समझना चाहिये।
आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।
अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म ।
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जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर ।

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