जय जिनेन्द्र ,
एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है । 


कायोत्सर्ग विशुद्धि का पाठ

काउस्सग्ग में आर्त्तध्यान, रौद्रध्यान ध्याया हो,
मन, वचन और काया चलित हुए हों तो तस्स मिच्छामि दुक्कडं। 

         यह पाठ कायोत्सर्ग करने के बाद बोला जाता है । कायोत्सर्ग में हुई विशुद्धि का मिच्छामि दुक्कडं दिया जाता है ।

आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।

अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म । 

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जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर ।