जय जिनेन्द्र ,

एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है । 

जैसे मैंने अपने पिछले ब्लॉग में बताया था कि इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि हर आगम को कौन से समय में पढ़ना चाहिए । 

भगवान ने हर आगम को पढ़ने के लिए एक निश्चित समय बताया है। इसलिए किसी भी आगम को किसी भी समय पढ़ना उचित नहीं है तथा अगर ऐसा किया जाए तो उसमें दोष / पाप लगता है ।

आगम को भगवान ने काल के अनुसार पढ़ने के लिए दो समय बताए हैं पहला कालिक दूसरा उत्कालिका । प्रत्येक आगम को इन दो समय मे विभाजित किया है। और हर आगम को भगवान द्वारा बताए गए समय के अनुसार ही पढ़ा जाना चाहिए , तो आइए जानते हैं कालिक और उत्कालिका क्या हैं।

जिन आगमो को भगवान ने कालिक बताया है वह पहले और अंतिम पौरुषी में पढ़े जाते हैं जबकि जो आगम उत्कालिक है उन्हें किसी भी समय पढ़ा जा सकता है लेकिन एक बात ध्यान रखना अतिआवश्यक है दोनों के बारे में वह यह है कि -
कालिक और उत्कालिक दोनों ही आगम दिन एवं रात के 12:00 से 1:00 बजे के बीच में नहीं पढ़े जाते हैं तथा सूर्य उदय से 36 मिनट पहले एवं 12 मिनट बाद तथा सूर्य अस्त से 36 मिनट पहले एवं 12 मिनट बाद तक नहीं पड़ना चाहिए ।

आवश्यक सूत्र एकमात्र ऐसा अगम है जो किसी भी समय पढ़ा जा सकता है ।

यह मनाई आगम के मूल श्लोक को पड़ने पर लगाई गई है अर्थात इन समय में आगमो के मूल को नहीं पढ़ा जाना चाहिए भावार्थ या अर्थ को पढ़ने में कोई बाधा नहीं है ।

स्त्री को अपने मासिक धर्म के समय किसी भी आगम के मूल पाठ / मूल श्लोक को नहीं पड़ना चाहिए वरना दोष / पाप लगता है। 

अब प्रत्येक आगम को कालिक और उत्कालिक में विभाजित करते हैं ।

1)  आचारांग (आयारो ) - कालिक

2)  सूत्रकृतांग (सूयगडो ) - कालिक

3)  स्थानाङ्ग (ठाणं ) - कालिक

4)  समवायाङ्ग (समवाओ ) - कालिक

5)  व्याख्याप्रज्ञप्ति (विवाहपण्णत्ती , भगवई ) - कालिक

6)  ज्ञाताधर्मकथाङ्ग (णायाधम्मकहाओ ) - कालिक

7)  उपासकदशाङ्ग (उवासगदसाओ ) - कालिक

8)  अन्तकृद्दशाड़ (अंतगडदसाओ ) - कालिक

9)  अनुत्तरौपपातिकदशा (अणुत्तरोववाइयदसाओ ) - कालिक

10) प्रश्नव्याकरण (पण्हावागरणाइं ) - कालिक

11) विपाक सूत्र (विवागसुयं ) - कालिक

12) औपपातिक [उ (ओ )ववाइय ] - कालिक

13) राजप्रश्नीय (रायपसेणियं ) - उत्कालिक

14) जीवाभिगम (जीवाभिगमो ) - उत्कालिक

15) प्रज्ञापना (पण्णवणा ) - उत्कालिक

16) जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति ( जम्बूद्दीवपण्णात्ती ) - कालिक

17) चन्द्रप्रज्ञप्ति (चंदपण्णत्ती ) - उत्कालिक

18) सूर्यप्रज्ञप्ति (सूरपण्णत्ती ) - उत्कालिक

19) निरयावलिका (णिरयावलियाओ कप्पियाओ) - कालिक

20) कल्पावतंसिका (कप्पवडंसियाओ ) - कालिक

21) पुष्पिका (पुप्फियाओ ) - कालिक

22) पुष्पचूलिका (पुप्फचूलियाओ ) - कालिक

23) वृष्णिदशा (वण्हीदसाओ ) - कालिक

24) उत्तराध्ययन (उत्तरज्झयणाइं ) - कालिक

25) दशवैकालिक (दसवेयालियं ) - उत्कालिक

26) नंदीसूत्र (नंदी ) - उत्कालिक

27) अनुयोगद्वार सूत्र (अणुओगदाराइं ) - उत्कालिक

28) दशाश्रुतस्कन्ध (दसाओ ) - कालिक

29) बृहत्कल्प (कप्पो ) - कालिक

30) व्यवहार सूत्र (ववहारो ) - कालिक

31) निशीथ सूत्र (निसीह ) - कालिक

32) आवश्यक सूत्र (आवस्सयं ) - उत्कालिक

आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।

अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म । 

पूरा ब्लॉग पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । अगर आपको यह ब्लॉग अच्छा लगा हो तो नीचे comment में हमें जरूर बताएं ।आप हमें FOLLOW एवं E-MAIL द्वारा सब्सक्राइब भी कर सकते हैं ताकि आपके पास यह ज्ञान निरंतर आता रहे।
 
जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर