जय जिनेन्द्र ,
एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ।
जैसे मैंने अपने पिछले ब्लॉग में बताया था कि इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि चार मूल सूत्र , चार छेद सूत्र एवं आवश्यक सूत्र को पढ़कर हमें उस आगमो से क्या सीखने को मिलेगा अर्थात उसमें क्या-क्या जानकारी दी गई है।
आज हम 24 से 32 आगमो में क्या सिखने को मिलता है यह पता लगाएंगे । तो आयिए शुरू करते हैं ।
24) उत्तराध्ययन (उत्तरज्झयणाइं ) = इस आगम में भगवान की अंतिम अमूल्य देशना बताई गई है । भगवान ने यह समस्त जीवो के लिए बताइए है ।
25) दशवैकालिक (दसवेयालियं ) = इस आगम में साधु आचार के बारे में बताया गया है । यह दीक्षा का टिकट है ।
26) नंदीसूत्र (नंदी ) = इस आगम में पांच ज्ञान के बारे में जानकारी दी गई है । इसलिए यह ज्ञान का आनंद है ।
27) अनुयोगद्वार सूत्र (अणुओगदाराइं ) = इस आगम को पढ़कर हम सूत्रों के द्वार खोल सकते हैं । इसमें अनेक प्रकार की गणित बताई गई है ।
28) दशाश्रुतस्कन्ध (दसाओ ) = इस अगम में जैन धर्म का कानून एवं प्रायश्चित के बारे में बताया गया है । इस आगम में साधना चित समाधि प्रतिमाओं का उल्लेख है ।
29) बृहत्कल्प (कप्पो ) = इस आगम में भी जैन धर्म के कानून एवं प्रायश्चित के बारे में बताया गया है ।
30) व्यवहार सूत्र (ववहारो ) = इस आगम में भी जैन धर्म के कानून एवं प्रायश्चित के बारे में बताया गया है ।
31) निशीथ सूत्र (निसीह ) = इस आगम में भी जैन धर्म के कानून एवं प्रायश्चित के बारे में बताया गया है । इस आगम में प्रायश्चित के बारे में ज्यादा बताया गया है ।
32) आवश्यक सूत्र (आवस्सयं ) = यह सबसे छोटा आगम है लेकिन इस अगम का काम सबसे बड़ा माना जाता है तथा यह सबसे पहले पढ़ा और सीखा जाता है ।
यह थे हमारे 32 अगम और उनसे मिलने वाली जानकारियों का छोटा सा उल्लेख । यह आगम हमेशा या किसी भी समय नहीं पढ़े जाते हैं । हर एक आगम को पढ़ने का एक निश्चित समय होता है । इसलिए अगले ब्लॉक में हम जानेंगे कि कौन से आगम को कब पढ़ना चाहिए ।
आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।
अगले ब्लॉग में हम जानेंगे कि हर आगम को कौन से समय में पढ़ना चाहिए ।
अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म ।
पूरा ब्लॉग पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । अगर आपको यह ब्लॉग अच्छा लगा हो तो नीचे comment में हमें जरूर बताएं ।आप हमें FOLLOW एवं E-MAIL द्वारा सब्सक्राइब भी कर सकते हैं ताकि आपके पास यह ज्ञान निरंतर आता रहे।
जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर

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