जय जिनेन्द्र ,

एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है । 

जैन धर्म की बारह शिक्षा

१. सदा जीव की रक्षा करना । 
२. मुख से सच्ची बातें कहना ।
३. माँग - पूछकर वस्तु लेना । 
४. सदाचार का पालन करना । 
५. अपनी इच्छा सदा घटाना ।
६. व्यर्थ इधर-उधर नहीं आना जाना। 
७. सीधा-सादा जीवन-जीना । 
८. कोई अनर्थ का काम न करना। 
९. नित उठकर सामायिक करना ।
१०. जीवन में मर्यादा रखना । 
११. बने जहाँ तक पौषध आदि करना । 
१२. अपने हाथों से बहराना।


आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।

अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म । 

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जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर ।