जय जिनेन्द्र ,
एक बार फिर से आप सबका इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ।
सामायिक पारने की विधि
सामायिक पारने के समय नमस्कार सूत्र तीन बार बोलना, इसके बाद सम्यक्त्व सूत्र बोलना । फिर गुरुगुण स्मरण सूत्र बोलना । फिर आलोचना सूत्र बोलना इसके बाद उत्तरीकरण सूत्र बोलना फिर कायोत्सर्ग करना। कायोत्सर्ग में दो बार चतुर्विंशतिस्तव सूत्र का मन में ध्यान करना और " णमो अरहंताणं" कह कर कायोत्सर्ग पारना। फिर कायोत्सर्ग शुद्धि का पाठ बोलना उसके बाद एक बार चतुर्विंशतिस्तव सूत्र बोलकर तत्पश्चात् नीचे बैठ कर बायाँ घुटना खड़ा कर दो बार "णमोत्थुणं" का पाठ बोलना। दूसरी बार "णमोत्थुणं" का पाठ बोलने के समय "ठाणं संपत्ताणं" के स्थान पर "ठाणं संपाविउकामाणं " बोलना । इसके बाद "एयस्स नवमस्स" आदि पाठ बोलना। अंत में तीन बार "नमस्कार सूत्र" गिनकर सामायिक पारना ।
आज के लिए इस ब्लॉग में इतना ही ।
अगर भगवान की आज्ञा के विरूद्ध कुछ भी कहा हो तो मिच्छामी दुकड़म ।
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जय जिनेन्द्र ,
जय महावीर ।

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